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सामूहिक अवकाश पर गए 69 राजस्व अधिकारियों को नोटिस, 13 अप्रैल तक मांगा जवाब

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Bihar Revenue Department: बिहार सरकार ने सामूहिक अवकाश पर गए 69 परीक्ष्यमान राजस्व अधिकारियों से 13 अप्रैल 2026 तक स्पष्टीकरण मांगा है। जवाब नहीं देने पर विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

पटना: बिहार सरकार ने सामूहिक अवकाश पर गए राजस्व अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने 69वीं बीपीएससी बैच के 69 परीक्ष्यमान राजस्व अधिकारियों (RO) को नोटिस जारी कर उनसे 13 अप्रैल 2026 तक जवाब देने को कहा है।

विभाग ने साफ कर दिया है कि अगर तय समय के भीतर संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिला, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।

इस कार्रवाई को राज्य सरकार की तरफ से प्रशासनिक अनुशासन कायम करने की बड़ी पहल माना जा रहा है।

सामूहिक अवकाश को विभाग ने माना अवैध

विभाग की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि संबंधित अधिकारियों ने जिस तरह सामूहिक रूप से अवकाश लिया, वह नियमों के अनुरूप नहीं है।

सरकार ने इस सामूहिक अवकाश को अवैध मानते हुए गंभीर प्रशासनिक लापरवाही की श्रेणी में रखा है।

इसके अलावा आरोप यह भी है कि इन अधिकारियों ने कुछ सरकारी कार्यक्रमों और सेवा दायित्वों से बिना पूर्व अनुमति दूरी बनाई, जो सेवा नियमों के खिलाफ माना गया है।

यही वजह है कि विभाग ने अब उनसे लिखित स्पष्टीकरण मांगते हुए कड़ा संदेश देने की कोशिश की है।

13 अप्रैल तक जवाब नहीं तो सीधी कार्रवाई

नोटिस में अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा गया है कि उन्हें 13 अप्रैल 2026 तक अपना जवाब देना होगा।

यदि तय तारीख तक विभाग को कोई उत्तर प्राप्त नहीं होता है, तो यह मान लिया जाएगा कि संबंधित अधिकारी अपने पक्ष में कुछ कहना नहीं चाहते।

ऐसी स्थिति में विभाग एकतरफा विभागीय कार्रवाई आगे बढ़ाएगा।

यानी इस मामले में सरकार अब ढील देने के मूड में नजर नहीं आ रही है।

24 जिलों के अधिकारी कार्रवाई के दायरे में

यह पूरा मामला किसी एक जिले तक सीमित नहीं है।

राज्य के 24 जिलों में तैनात कुल 69 राजस्व अधिकारी इस कार्रवाई की जद में आए हैं।

इससे साफ है कि यह मामला राज्य स्तर पर फैला हुआ है और सरकार इसे एक गंभीर प्रशासनिक चुनौती के रूप में देख रही है।

सबसे ज्यादा अधिकारी कुछ चुनिंदा जिलों में तैनात पाए गए, जहां से सामूहिक अनुपस्थिति की स्थिति ज्यादा सामने आई।

किन जिलों में कितने अधिकारी?

विभागीय कार्रवाई के दायरे में आने वाले अधिकारियों की संख्या अलग-अलग जिलों में अलग है।

कुछ जिलों में बड़ी संख्या में अधिकारियों के नाम सामने आए हैं, जबकि कुछ जिलों में एक-एक अधिकारी से जवाब मांगा गया है।

प्रमुख जिलों का हाल:

गया में 8 अधिकारी

रोहतास में 7 अधिकारी

मधुबनी में 5 अधिकारी

इसके अलावा—

बक्सर

बेगूसराय

कटिहार

मधेपुरा

पूर्वी चंपारण

वैशाली

जमुई

में 4-4 अधिकारी कार्रवाई के दायरे में हैं।

वहीं—

सीवान

सीतामढ़ी

नालंदा

में 3-3 अधिकारी शामिल हैं।

जबकि औरंगाबाद में 2 अधिकारी इस सूची में हैं।

इन जिलों में 1-1 अधिकारी से भी जवाब

इसके अलावा पटना, किशनगंज, खगड़िया, पूर्णिया, सुपौल, नवादा, अररिया, अरवल और लखीसराय में तैनात एक-एक अधिकारी से भी जवाब मांगा गया है।

इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार ने मामले को जिलेवार नहीं, बल्कि व्यवहार और सेवा अनुशासन के आधार पर लिया है।

नोटिस में क्या कहा गया है?

विभाग की ओर से भेजे गए पत्र में साफ उल्लेख किया गया है कि संबंधित अधिकारियों की सामूहिक अनुपस्थिति को सामूहिक अवकाश मानते हुए पहले ही अवैध घोषित किया जा चुका है।

विभाग ने इस अवधि को ‘डाइज नॉन’ (Dies Non) की श्रेणी में भी रखने की बात कही है।

सरकारी सेवा में इसका सीधा मतलब यह होता है कि जिस अवधि को ‘डाइज नॉन’ माना जाता है, उसे सेवा अवधि का हिस्सा नहीं माना जाएगा।

यानी इस दौरान न तो नियमित सेवा लाभ मिलेंगे और न ही यह अवधि सामान्य सेवा गणना में शामिल होगी।

25 मार्च तक योगदान नहीं देने का आरोप

विभाग की आपत्ति का एक अहम बिंदु यह भी है कि संबंधित अधिकारियों ने 25 मार्च 2026 की शाम 5 बजे तक अपने-अपने पदों पर योगदान नहीं दिया।

सरकार का मानना है कि यह सिर्फ अनुपस्थिति का मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी भी है।

राजस्व जैसे संवेदनशील विभाग में अधिकारियों की गैरहाजिरी का असर सीधे आम लोगों के कामकाज पर पड़ सकता है।

भूमि, दाखिल-खारिज, म्यूटेशन, अंचल स्तर के राजस्व कार्य और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन जैसे कई जरूरी काम इससे प्रभावित हो सकते हैं।

सरकारी आदेशों की अवहेलना का आरोप

नोटिस में यह भी कहा गया है कि अधिकारियों का यह रवैया सरकारी आदेशों की अवहेलना के दायरे में आता है।

विभाग के अनुसार, सरकारी सेवक के रूप में उनकी जिम्मेदारी थी कि वे सेवा अनुशासन का पालन करें और बिना उचित अनुमति सामूहिक रूप से अनुपस्थित न रहें।

चूंकि ऐसा नहीं हुआ, इसलिए इस मामले को सामान्य छुट्टी या व्यक्तिगत अनुपस्थिति के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे अनुशासनहीनता के रूप में लिया गया है।

नियमावली उल्लंघन का भी हवाला

विभाग ने अपने पत्र में बिहार सरकारी सेवक आचरण नियमावली, 1976 का भी हवाला दिया है।

नोटिस के अनुसार, अधिकारियों का आचरण नियम 3(1) के उल्लंघन की श्रेणी में आता है।

यह नियम सरकारी कर्मचारियों से अपेक्षित आचरण, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा माना जाता है।

ऐसे में यह मामला सिर्फ अवकाश तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब यह सेवा आचरण और प्रशासनिक निष्ठा से जुड़ा प्रश्न बन गया है।

बर्खास्तगी तक की चेतावनी

मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि विभाग ने नोटिस में अधिकारियों से यह भी पूछा है कि उनके खिलाफ सेवा से बर्खास्तगी जैसी कठोर कार्रवाई क्यों न की जाए।

हालांकि अंतिम निर्णय अधिकारियों के जवाब और विभागीय जांच की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा, लेकिन सरकार ने अपने रुख से यह साफ कर दिया है कि इस मामले को हल्के में नहीं लिया जाएगा।

यह चेतावनी बाकी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भी एक बड़ा संदेश मानी जा रही है।

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प्रशासनिक अनुशासन पर सरकार का फोकस

बिहार सरकार पिछले कुछ समय से प्रशासनिक जवाबदेही और सेवा अनुशासन को लेकर लगातार सख्त रुख अपनाती दिख रही है।

खासतौर पर फील्ड पोस्टिंग वाले अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे नियमित रूप से अपने दायित्वों का निर्वहन करें, क्योंकि आम जनता का सीधा संपर्क इन्हीं अधिकारियों से होता है।

राजस्व विभाग में कामकाज रुकने या प्रभावित होने का असर गांव से लेकर जिला स्तर तक महसूस किया जा सकता है।

इसी वजह से सरकार इस मामले में उदाहरण पेश करने की कोशिश करती नजर आ रही है।

आम लोगों पर क्या पड़ सकता है असर?

राजस्व अधिकारियों की अनुपस्थिति का असर सीधे उन लोगों पर पड़ सकता है, जो जमीन, दाखिल-खारिज, म्यूटेशन, प्रमाण पत्र, सीमांकन या अन्य राजस्व सेवाओं के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाते हैं।

अगर अधिकारी लंबे समय तक अनुपस्थित रहते हैं, तो जनता के जरूरी काम अटक सकते हैं।

यही कारण है कि सरकार इस तरह की सामूहिक गैरहाजिरी को सिर्फ कर्मचारी मुद्दा नहीं, बल्कि जनसेवा में बाधा के रूप में भी देख रही है।

प्रशासनिक दृष्टि से यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि इसका असर सीधे जमीनी शासन व्यवस्था पर पड़ता है।

क्या हो सकता है आगे?

अब इस पूरे मामले में अगला महत्वपूर्ण पड़ाव 13 अप्रैल 2026 होगा।

यही वह तारीख है, जिसके भीतर सभी संबंधित अधिकारियों को अपना जवाब देना है।

अगर जवाब विभाग को संतोषजनक लगता है, तो आगे की कार्रवाई का स्वरूप अलग हो सकता है।

लेकिन अगर जवाब नहीं दिया गया या जवाब कमजोर पाया गया, तो विभागीय जांच, दंडात्मक कार्रवाई या कड़ी प्रशासनिक सजा की दिशा में मामला बढ़ सकता है।

निष्कर्ष

Bihar Revenue Department की इस कार्रवाई ने साफ संकेत दे दिया है कि बिहार सरकार अब सामूहिक अवकाश और सेवा अनुशासनहीनता जैसे मामलों में नरमी बरतने के मूड में नहीं है।

69 राजस्व अधिकारियों को नोटिस भेजकर सरकार ने न सिर्फ जवाबदेही तय करने की कोशिश की है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में अनुशासन बनाए रखने का भी संदेश दिया है।

अब सबकी नजर 13 अप्रैल पर टिकी है, जब यह साफ होगा कि संबंधित अधिकारी क्या जवाब देते हैं और सरकार इस मामले में आगे कितना कड़ा कदम उठाती है।

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